क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी आंखों का रंग आपके दादा-दादी से कैसे मिला? या फिर यह कि क्यों कभी-कभी बच्चे अपने माता-पिता से बिल्कुल अलग दिखते हैं? जब आप अपने परिवार की पुरानी तस्वीरों को देखते हैं, तो आप पाएंगे कि कुछ विशेषताएं पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। यही है वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत (Inheritance) का अद्भुत संसार!
आज के समय में, जब हम कोविड-19 (COVID-19) के नए प्रकारों के बारे में सुनते हैं, या जब किसान बेहतर फसल के लिए नई किस्मों का चुनाव करते हैं, या जब डॉक्टर आनुवंशिक बीमारियों का इलाज करते हैं – हर जगह आनुवंशिकता के सिद्धांत काम कर रहे हैं।
सोचिए, अगर ग्रेगर मेंडल (Gregor Mendel) ने 150 साल पहले अपने मटर के पौधों पर प्रयोग नहीं किए होते, तो आज हमारे पास इंसुलिन का उत्पादन (Insulin Production), जीन थेरेपी (Gene Therapy), और फसल सुधार (Crop Improvement) की तकनीकें नहीं होतीं!
इस अध्याय में आप सीखेंगे कि कैसे प्रकृति ने जीवों में विविधता बनाए रखने की अपनी अनोखी व्यवस्था बनाई है। डीएनए (DNA) को एक विशाल पुस्तकालय की तरह समझें जिसमें जीवन की सभी जानकारी संग्रहीत है – यह पुस्तकालय हर कोशिका में मौजूद है और इसमें हमारे सभी लक्षणों के निर्देश लिखे हैं।
शिक्षण के उद्देश्य (Learning Objectives)
इस अध्याय को पूरा करने के बाद, आप निम्नलिखित में दक्ष हो जाएंगे:
- मेंडल के वंशावली नियमों (Mendel’s Laws of Inheritance) को समझना और दैनिक जीवन की परिस्थितियों में उनका उपयोग करना
- आनुवंशिकता के विभिन्न रूपों – अपूर्ण प्रभुत्व (Incomplete Dominance), सह-प्रभुत्व (Co-dominance), बहुअपयाप (Multiple Alleles) को पहचानना
- लिंग निर्धारण (Sex Determination) की क्रिया और लिंग सहलग्न वंशावली (Sex-linked Inheritance) की व्याख्या करना
- गुणसूत्र सिद्धांत (Chromosomal Theory), सहलग्नता (Linkage) और पारगमन (Crossing Over) को समझाना
- मानव आनुवंशिक विकारों जैसे रक्तस्राव (Haemophilia), वर्णान्धता (Colour Blindness), डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome) का विश्लेषण करना
- CBSE परीक्षा पद्धति के अनुसार विभिन्न प्रकार के प्रश्नों को हल करने की कुशल रणनीति विकसित करना
वंशागति तथा विविधता के सिद्धांत (Principles of Inheritance and Variation)
1. आनुवंशिकता की आधारभूत संकल्पनाएं (Basic Concepts of Inheritance)
आनुवंशिकता (Heredity) का अर्थ है माता-पिता से संतान में गुणों का स्थानांतरण। इसे इस तरह समझें – मान लीजिए डीएनए (DNA) एक रेसिपी बुक है जिसमें जीवन बनाने की सभी विधियां लिखी हैं। यह रेसिपी बुक हमारे शरीर की हर कोशिका में मौजूद है।
विविधता (Variation) तब पैदा होती है जब यह जानकारी एक पीढ़ी से दूसरी में जाती है। यह प्रकृति का तरीका है जीवों में नएपन को लाने का, ताकि वे बदलते परिवेश में जीवित रह सकें।
मुख्य शब्दावली:
- जीन (Gene): डीएनए का वह हिस्सा जो किसी विशेष गुण को नियंत्रित करता है
- अपयाप (Allele): एक ही जीन के विभिन्न रूप (जैसे लंबे और बौने पौधे के लिए अलग-अलग अपयाप)
- जीनप्ररूप (Genotype): जीन की वास्तविक बनावट (जैसे TT, Tt, tt)
- लक्षणप्ररूप (Phenotype): बाहरी रूप-रंग (जैसे लंबा या बौना दिखना)
वास्तविक जीवन में जीव विज्ञान: मान लीजिए आपके पिता के बाल घुंघराले हैं और माता के सीधे। आपके बालों की बनावट इसी आनुवंशिक मिश्रण का परिणाम है। यही कारण है कि भाई-बहनों में भी अलग-अलग विशेषताएं दिखती हैं।
2. ग्रेगर मेंडल और उनके ऐतिहासिक प्रयोग (Gregor Mendel and His Historical Experiments)
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: सन् 1860 के दशक में, ऑस्ट्रिया के एक धर्मगुरु ग्रेगर मेंडल ने अपने मठ के बगीचे में मटर के पौधों पर प्रयोग किए। उन्होंने 7 वर्षों तक 28,000 मटर के पौधों का अध्ययन किया और आनुवंशिकता के नियमों की खोज की।
मेंडल ने मटर के पौधे क्यों चुने?
- आसानी से उगाए जा सकते हैं और जल्दी बढ़ते हैं
- तुरंत संतानोत्पादन (Reproduction) होती है
- स्पष्ट विपरीत लक्षण हैं (लंबा-बौना, गोल-झुर्रीदार बीज)
- स्व-परागण (Self-pollination) और पर-परागण (Cross-pollination) दोनों संभव हैं
मेंडल के प्रयोग की पद्धति:
- शुद्ध वंशावली (Pure breeding lines) बनाना (P पीढ़ी)
- पर-परागण करना (F1 पीढ़ी प्राप्त करना)
- स्व-परागण करना (F2 पीढ़ी प्राप्त करना)
- सांख्यिकी विश्लेषण करना

सामान्य गलती चेतावनी: छात्र अक्सर F1 और F2 पीढ़ी को भ्रमित करते हैं। याद रखें: F1 = प्रथम संतति (First Filial), F2 = द्वितीय संतति (Second Filial)।
3. मेंडल के वंशावली नियम (Mendel’s Laws of Inheritance)
3.1 प्रभुत्व का नियम (Law of Dominance)
जब दो विपरीत लक्षणों वाले जीव संकरण करते हैं, तो F1 पीढ़ी में केवल प्रभावी (Dominant) लक्षण दिखाई देता है।
उदाहरण: लंबे (TT) × बौने (tt) = सभी लंबे (Tt)
प्रक्रिया विश्लेषण:
- युग्मक निर्माण: TT से T युग्मक, tt से t युग्मक
- निषेचन (Fertilization): T + t = Tt
- परिणाम: सभी Tt (लक्षणप्ररूप में लंबे)
3.2 पृथक्करण का नियम (Law of Segregation)
F1 संकर में मौजूद अपयाप F2 पीढ़ी में अलग हो जाते हैं।
F2 में अनुपात:
- जीनप्ररूप अनुपात: 1 TT : 2 Tt : 1 tt
- लक्षणप्ररूप अनुपात: 3 लंबे : 1 बौने
3.3 स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम (Law of Independent Assortment)
दो या अधिक लक्षण जोड़े स्वतंत्र रूप से वंशानुगत होते हैं।
द्विसंकर संकरण उदाहरण (Dihybrid Cross Example):
- गोल पीले (RRYY) × झुर्रीदार हरे (rryy)
- F2 अनुपात: 9:3:3:1

जीव विज्ञान जांच: यदि F1 पीढ़ी में सभी पौधे लंबे हैं, तो F2 में छोटे पौधों का प्रतिशत क्या होगा? (उत्तर: 25%)
4. मेंडलवाद से विचलन (Deviations from Mendelism)
4.1 अपूर्ण प्रभुत्व (Incomplete Dominance)
यहां कोई भी अपयाप पूरी तरह प्रभावी नहीं है, जिससे F1 में मध्यवर्ती लक्षणप्ररूप (Intermediate Phenotype) दिखता है।
उदाहरण: गुलाब की पंखुड़ियां
- लाल (RR) × सफेद (WW) = गुलाबी (RW)
- F2 अनुपात: 1 लाल : 2 गुलाबी : 1 सफेद
वास्तविक जीवन में: मानव में बालों की बनावट (सीधे, लहराते, घुंघराले) अक्सर अपूर्ण प्रभुत्व का उदाहरण है।
4.2 सह-प्रभुत्व (Co-dominance)
दोनों अपयाप साथ में अभिव्यक्त होते हैं।
मुख्य उदाहरण: ABO रक्त समूह
- IA और IB अपयाप सह-प्रभावी हैं
- i अपयाप अप्रभावी है
- संभावित जीनप्ररूप: IAIA, IAIB, IBIB, IAi, IBi, ii
- लक्षणप्ररूप: A, AB, B, A, B, O

प्रक्रिया विश्लेषण – रक्त समूह वंशावली:
- माता-पिता के रक्त समूह पहचानें
- संभावित जीनप्ररूप निकालें
- युग्मक बनाएं
- वर्गपट्ट बनाएं
- संतति के रक्त समूह की गणना करें
4.3 बहुअपयाप (Multiple Alleles)
एक ही जीन के 3 या अधिक अपयापी रूपों का होना।
उदाहरण:
- ABO रक्त समूह तंत्र में IA, IB, i
- खरगोश में कोट रंग में C, ch, ch, c
सामान्य गलती चेतावनी: बहुअपयाप का मतलब यह नहीं कि एक व्यक्ति में 3 अपयाप होते हैं। हर व्यक्ति में सिर्फ 2 अपयाप होते हैं – एक मातृ, एक पितृ।
5. लिंग निर्धारण और लिंग सहलग्न वंशावली (Sex Determination and Sex-linked Inheritance)
5.1 लिंग निर्धारण के प्रकार
मनुष्यों में (XY तंत्र):
- पुरुष: XY (विषमयुग्मकी)
- स्त्री: XX (समयुग्मकी)
- सभी अंडाणुओं में X, शुक्राणुओं में X या Y
पक्षियों में (ZW तंत्र):
- नर: ZZ
- मादा: ZW
मधुमक्खी में (अर्धगुणिता):
- मादा: द्विगुणित (2n)
- नर: अगुणित (n) – अनिषेचित अंडों से

5.2 लिंग सहलग्न वंशावली (Sex-linked Inheritance)
X-गुणसूत्र पर स्थित जीनों की वंशावली पद्धति अलग होती है।
रक्तस्राव (Haemophilia) – X-सहलग्न अप्रभावी:
- XH = सामान्य रक्त जमाव
- Xh = रक्तस्राव
- प्रभावित पुरुष: XhY
- वाहक स्त्रियां: XHXh
वंशावली रूप:
- प्रभावित पिता × सामान्य माता → सभी बेटियां वाहक, सभी बेटे सामान्य
- वाहक माता × सामान्य पिता → 50% बेटे प्रभावित, 50% बेटियां वाहक
वर्णान्धता (Colour Blindness):
रक्तस्राव जैसी ही पद्धति, लेकिन व्यापकता अधिक है।
वास्तविक जीवन में जीव विज्ञान: यही कारण है कि रक्तस्राव और वर्णान्धता पुरुषों में अधिक सामान्य है। स्त्रियों में दो X गुणसूत्र होते हैं, इसलिए एक दोषपूर्ण जीन को दूसरा सामान्य जीन संतुलित कर देता है।
6. गुणसूत्र सिद्धांत और सहलग्नता (Chromosomal Theory and Linkage)
6.1 गुणसूत्र सिद्धांत (Chromosomal Theory of Inheritance)
मुख्य बिंदु:
- जीन गुणसूत्रों पर स्थित हैं
- जीनों का व्यवहार गुणसूत्रों के व्यवहार के समान है
- समजात गुणसूत्रों (Homologous Chromosomes) में समान जीन होते हैं
ऐतिहासिक संदर्भ: वाल्टर सटन (Walter Sutton) और थियोडोर बोवेरी (Theodor Boveri) (1902) ने स्वतंत्र रूप से यह सिद्धांत दिया।
6.2 सहलग्नता (Linkage)
एक ही गुणसूत्र पर स्थित जीन एक साथ वंशानुगत होते हैं।
प्रकार:
- पूर्ण सहलग्नता: कोई पुनर्संयोजन (Recombination) नहीं
- अपूर्ण सहलग्नता: कुछ पुनर्संयोजन होती है
6.3 पारगमन (Crossing Over)
अर्धसूत्री विभाजन (Meiosis) के प्रोफेज I में समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थ का आदान-प्रदान।
महत्व:
- आनुवंशिक पुनर्संयोजन बढ़ता है
- विकास में योगदान
- जीन मानचित्रण में उपयोग

प्रक्रिया विश्लेषण – पुनर्संयोजन आवृत्ति:
- कुल संतति की गिनती करें
- पुनर्संयोजी प्रकार पहचानें
- सूत्र: (पुनर्संयोजी/कुल) × 100 = मानचित्र दूरी (सेंटीमॉर्गन में)
7. मनुष्यों में आनुवंशिक विकार (Genetic Disorders in Humans)
7.1 मेंडलीय विकार (Mendelian Disorders)
थैलेसीमिया (Thalassemia):
- बीटा-ग्लोबिन जीन में उत्परिवर्तन (Mutation)
- स्वयुग्मसोमी अप्रभावी (Autosomal Recessive)
- HbA: सामान्य, HbS: हंसिया कोशिका
- लक्षण: रक्ताल्पता (Anemia), बढ़ी हुई तिल्ली
हंसिया कोशिका रक्ताल्पता (Sickle Cell Anemia):
- बिंदु उत्परिवर्तन (Point Mutation) (GAG → GTG)
- ग्लूटामिक अम्ल → वैलीन
- हंसिया आकार की लाल रक्त कोशिकाएं
7.2 गुणसूत्रीय विकार (Chromosomal Disorders)
डाउन सिंड्रोम (Down Syndrome):
- त्रिसूत्रता 21 (Trisomy 21) (47 गुणसूत्र)
- विशेषताएं: मानसिक मंदता, चौड़ा सपाट चेहरा, छोटा कद
- मातृ आयु प्रभाव: आयु के साथ जोखिम बढ़ता है
टर्नर सिंड्रोम (Turner Syndrome):
- 45, X (एकसूत्रता)
- केवल स्त्रियों में
- छोटा कद, बांझपन, जालीदार गर्दन
क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम (Klinefelter Syndrome):
- 47, XXY
- केवल पुरुषों में
- लंबा कद, स्त्रीकरण, बांझपन
[चित्र वर्णन: सामान्य गुणसूत्र सेट बनाम गुणसूत्रीय असामान्यताओं (डाउन सिंड्रोम, टर्नर सिंड्रोम, क्लाइनफेल्टर सिंड्रोम) की तुलना]
वर्तमान अनुसंधान: आजकल क्रिस्पर-कैस9 तकनीक (CRISPR-Cas9 Technology) का उपयोग करके आनुवंशिक विकारों को ठीक करने की खोज हो रही है। जीन चिकित्सा (Gene Therapy) के माध्यम से हंसिया कोशिका रक्ताल्पता के कुछ मामले सफलतापूर्वक ठीक हो चुके हैं।
8. आनुवंशिक परामर्श और जांच (Genetic Counseling and Testing)
8.1 आनुवंशिक परामर्श का महत्व
कब आवश्यक है:
- पारिवारिक इतिहास में आनुवंशिक विकार
- अधिक मातृ आयु (>35 वर्ष)
- पहले प्रभावित बच्चा
- संबंधी विवाह (रक्त संबंधियों में शादी)
8.2 प्रसवपूर्व निदान (Prenatal Diagnosis)
तकनीकें:
- उदकपुंज वेधन (Amniocentesis): 15-18 सप्ताह में उदकीय द्रव की जांच
- गर्भरस रोम प्रतिचयन (Chorionic Villus Sampling – CVS): 10-12 सप्ताह में नाल ऊतक
- पराध्वनि चित्रण (Ultrasonography): शारीरिक असामान्यताएं पहचानना
सामान्य त्रुटि चेतावनी: उदकपुंज वेधन कभी भी प्रथम तिमाही में नहीं की जाती। यह द्वितीय तिमाही की तकनीक है।
9. आनुवंशिकता के आधुनिक उपयोग (Modern Applications of Genetics)
9.1 आनुवंशिक अभियांत्रिकी में उपयोग
मानव इंसुलिन उत्पादन:
मधुमेह के रोगियों के लिए मानव इंसुलिन को जीवाणुओं में उत्पादित करना। यह पुनर्संयोजी डीएनए तकनीक (Recombinant DNA Technology) का उत्कृष्ट उदाहरण है जो वंशावली सिद्धांतों पर आधारित है।
9.2 फसल सुधार में योगदान
बीटी कपास (Bt Cotton):
कीट प्रतिरोध के लिए बैसिलस थुरिंजिएंसिस (Bacillus thuringiensis) के जीनों को कपास के पौधों में स्थानांतरित करना।
9.3 जीन चिकित्सा
सफल उदाहरण:
- गंभीर संयुक्त प्रतिरक्षाहीनता (Severe Combined Immunodeficiency – SCID) का इलाज
- वंशानुगत अंधत्व (Leber Congenital Amaurosis) का उपचार
वर्तमान अनुसंधान: कार-टी कोशिका चिकित्सा (CAR-T Cell Therapy) में भी वंशावली सिद्धांतों का उपयोग होता है जहां रोगी की टी-कोशिकाओं को आनुवंशिक रूप से संशोधित करके कैंसर कोशिकाओं को लक्षित करने के लिए तैयार किया जाता है।
10. विकासवादी आनुवंशिकता (Evolutionary Genetics)
10.1 हार्डी-वाइनबर्ग सिद्धांत
जनसंख्या आनुवंशिकता (Population Genetics) में अपयाप आवृत्तियां कैसे स्थिर रहती हैं।
शर्तें:
- कोई उत्परिवर्तन नहीं
- यादृच्छिक संभोग (Random Mating)
- कोई चयन नहीं
- बड़ी जनसंख्या आकार
- कोई जीन प्रवाह नहीं
सूत्र: p² + 2pq + q² = 1
10.2 विकास में आनुवंशिक विविधता की भूमिका
प्राकृतिक चयन का आधार:
- आनुवंशिक विविधता होनी चाहिए
- विविधता वंशानुगत होनी चाहिए
- भिन्न प्रजनन होना चाहिए
आधुनिक उदाहरण: कोविड-19 महामारी में विषाणु के नए प्रकारों का उदय – यह आनुवंशिक विविधता और प्राकृतिक चयन का जीवंत उदाहरण है।
गहन निष्कर्ष और परीक्षा रणनीति (Comprehensive Conclusion and Exam Strategy)
मुख्य संकल्पनाओं का सारांश
आनुवंशिकता और विविधता के सिद्धांत जीव विज्ञान की सबसे मौलिक अवधारणाएं हैं जो जीवन की निरंतरता और विकास को समझने की कुंजी हैं। इस अध्याय में हमने देखा कि कैसे:
- मेंडल के नियम आज भी आनुवंशिकता की आधारशिला हैं
- जीन और गुणसूत्रों के बीच का संबंध जीवन की जटिलता को समझाता है
- आनुवंशिक विकारों की समझ चिकित्सा विज्ञान में क्रांति ला रही है
- आधुनिक तकनीकें मानव कल्याण में योगदान दे रही हैं
CBSE परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
विषयवार तैयारी रणनीति:
उच्च प्राथमिकता वाले विषय:
- मेंडल के नियम और उनके उपयोग (40% भार)
- लिंग सहलग्न वंशावली (रक्तस्राव, वर्णान्धता) (25% भार)
- ABO रक्त समूह वंशावली (20% भार)
- गुणसूत्रीय विकार (15% भार)
अभ्यास प्रश्न संग्रह (Practice Questions Collection)
बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Questions)
प्रश्न 1: मेंडल के स्वतंत्र अपव्यूहन नियम का आधार क्या है?
क) जीन एक ही गुणसूत्र पर होते हैं
ख) अलग-अलग लक्षणों के जीन अलग गुणसूत्रों पर होते हैं
ग) सभी जीन प्रभावी होते हैं
घ) युग्मक निर्माण यादृच्छिक होता है
उत्तर: ख) अलग-अलग लक्षणों के जीन अलग गुणसूत्रों पर होते हैं
व्याख्या: स्वतंत्र अपव्यूहन तभी संभव है जब जीन विभिन्न गुणसूत्रों पर हों। एक ही गुणसूत्र पर होने से सहलग्नता होती है।
प्रश्न 2: ABO रक्त समूह तंत्र में कितने अपयाप होते हैं?
क) 2
ख) 3
ग) 4
घ) 6
उत्तर: ख) 3 (IA, IB, i)
प्रश्न 3: टर्नर सिंड्रोम में गुणसूत्र संयोजन कौन सा होता है?
क) 47, XXY
ख) 47, XXX
ग) 45, X
घ) 46, XY
उत्तर: ग) 45, X
प्रश्न 4: वर्णान्धता और रक्तस्राव दोनों हैं:
क) स्वयुग्मसोमी प्रभावी
ख) स्वयुग्मसोमी अप्रभावी
ग) X-सहलग्न प्रभावी
घ) X-सहलग्न अप्रभावी
उत्तर: घ) X-सहलग्न अप्रभावी
प्रश्न 5: द्विसंकर संकरण में F2 पीढ़ी का लक्षणप्ररूप अनुपात होता है:
क) 3:1
ख) 1:2:1
ग) 9:3:3:1
घ) 1:1:1:1
उत्तर: ग) 9:3:3:1
प्रश्न 6: डाउन सिंड्रोम का कारण है:
क) त्रिसूत्रता 18
ख) त्रिसूत्रता 21
ग) एकसूत्रता X
घ) XXY संयोजन
उत्तर: ख) त्रिसूत्रता 21
अभिकथन-कारण प्रकार प्रश्न (Assertion-Reasoning Questions)
प्रश्न 7:
अभिकथन (A): रक्तस्राव पुरुषों में अधिक पाया जाता है।
कारण (R): रक्तस्राव X-सहलग्न अप्रभावी विकार है।
क) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
ख) A और R दोनों सत्य हैं लेकिन R, A की सही व्याख्या नहीं है
ग) A सत्य है लेकिन R गलत है
घ) A गलत है लेकिन R सत्य है
उत्तर: क) A और R दोनों सत्य हैं और R, A की सही व्याख्या है
स्थिति अध्ययन आधारित प्रश्न (Case Study Based Questions)
स्थिति अध्ययन 1: राज और सुनीता की शादी हुई है। राज का रक्त समूह A है और सुनीता का B है। उनके पहले बच्चे का रक्त समूह AB है और दूसरे का O है।
प्रश्न 8: राज का जीनप्ररूप क्या है?
क) IAIA
ख) IAi
ग) IBIB
घ) IBi
उत्तर: ख) IAi
प्रश्न 9: सुनीता का जीनप्ररूप क्या है?
क) IBIB
ख) IBi
ग) IAIA
घ) IAi
उत्तर: ख) IBi
प्रश्न 10: उनके तीसरे बच्चे में B रक्त समूह होने की संभावना क्या है?
क) 0%
ख) 25%
ग) 50%
घ) 75%
उत्तर: ख) 25%
व्याख्या: संकरण: IAi × IBi
संतति अनुपात: 1 IAIB : 1 IAi : 1 IBi : 1 ii
रक्त समूह: AB : A : B : O = 1:1:1:1
इसलिए B रक्त समूह की संभावना = 1/4 = 25%
चित्र आधारित प्रश्न (Diagram Based Questions)
प्रश्न 11: निम्नलिखित वंशावली चार्ट का अध्ययन करें और बताएं कि यह विकार किस प्रकार का है:
[पाठ प्रतिनिधित्व: पीढ़ी I में सामान्य पुरुष और सामान्य स्त्री, पीढ़ी II में 2 सामान्य पुरुष, 1 सामान्य स्त्री, 1 प्रभावित पुरुष, पीढ़ी III में प्रभावित पुरुष से सामान्य स्त्री से 2 सामान्य स्त्रियां और 1 प्रभावित पुरुष]
क) स्वयुग्मसोमी प्रभावी
ख) स्वयुग्मसोमी अप्रभावी
ग) X-सहलग्न प्रभावी
घ) X-सहलग्न अप्रभावी
उत्तर: घ) X-सहलग्न अप्रभावी
लघु उत्तरीय प्रश्न (Short Answer Questions)
प्रश्न 12: अपूर्ण प्रभुत्व और सह-प्रभुत्व के बीच अंतर स्पष्ट करें। (2 अंक)
उत्तर:
अपूर्ण प्रभुत्व:
- F1 में मध्यवर्ती लक्षणप्ररूप दिखता है
- दोनों अपयापों का मिश्रण प्रभाव होता है
- उदाहरण: लाल × सफेद = गुलाबी (गुलाब में)
सह-प्रभुत्व:
- F1 में दोनों अपयापों की स्पष्ट अभिव्यक्ति होती है
- कोई मिश्रण नहीं होता
- उदाहरण: ABO रक्त समूह में AB प्रकार
प्रश्न 13: परीक्षण संकरण क्या है और इसका उपयोग क्यों किया जाता है? (2 अंक)
उत्तर:
परीक्षण संकरण एक अज्ञात जीनप्ररूप के जीव को समयुग्मजी अप्रभावी के साथ संकरण करना है।
उपयोग:
- अज्ञात जीनप्ररूप (समयुग्मजी या विषमयुग्मजी) पता करने के लिए
- यदि संतति में अप्रभावी लक्षणप्ररूप दिखे तो अज्ञात विषमयुग्मजी है
- यदि सभी संतति प्रभावी लक्षणप्ररूप दिखाएं तो अज्ञात समयुग्मजी प्रभावी है
प्रश्न 14: लिंग सहलग्न वंशावली की विशेषताएं लिखें। (3 अंक)
उत्तर:
- पुरुष प्रधानता: पुरुषों में अधिक प्रभावित होना
- पुरुष से पुरुष में स्थानांतरण नहीं: पिता से पुत्र में सीधा स्थानांतरण नहीं
- वाहक स्त्रियां: स्त्रियां वाहक हो सकती हैं बिना प्रभावित हुए
- प्रभावित पुरुष × सामान्य स्त्रियां: सभी बेटियां वाहक, सभी बेटे सामान्य
- तिर्यक वंशावली: दादा से नाती में स्थानांतरण
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Questions)
प्रश्न 15: मेंडल के वंशावली नियमों का विस्तृत वर्णन करें। उदाहरण सहित समझाएं। (5 अंक)
उत्तर:
मेंडल के तीन नियम:
1. प्रभुत्व का नियम:
- विपरीत लक्षणों के संकरण में F1 में केवल प्रभावी लक्षण दिखता है
- अप्रभावी लक्षण छुप जाता है लेकिन समाप्त नहीं होता
- उदाहरण: लंबा (TT) × बौना (tt) → सभी लंबे (Tt)
2. पृथक्करण का नियम:
- F1 संकर में दोनों अपयाप अलग रहते हैं
- युग्मक निर्माण के समय पृथक हो जाते हैं
- F2 में 3:1 का लक्षणप्ररूप अनुपात
- उदाहरण: Tt × Tt → 1 TT : 2 Tt : 1 tt
3. स्वतंत्र अपव्यूहन का नियम:
- दो या अधिक जीन जोड़े स्वतंत्र रूप से अपव्यूहित होते हैं
- द्विसंकर संकरण में 9:3:3:1 अनुपात
- उदाहरण: RrYy × RrYy में 16 संयोजन
महत्व:
- आनुवंशिकता की वैज्ञानिक समझ
- पादप और जंतु प्रजनन में उपयोग
- चिकित्सा आनुवंशिकता की नींव
प्रश्न 16: डाउन सिंड्रोम के कारण, लक्षण और निदान के बारे में विस्तार से लिखें। (5 अंक)
उत्तर:
कारण:
- त्रिसूत्रता 21 (21वें गुणसूत्र की अतिरिक्त प्रति)
- कुल 47 गुणसूत्र होते हैं सामान्य 46 के बजाय
- अर्धसूत्री विभाजन के दौरान गुणसूत्र 21 का अवियोजन
लक्षण:
- शारीरिक विशेषताएं:
- मानसिक मंदता
- चौड़ा सपाट चेहरा
- छोटा कद
- ऊपर की ओर तिर्छी आंखें
- बाहर निकली जीभ
- चिकित्सा जटिलताएं:
- जन्मजात हृदय दोष
- श्वसन संक्रमण
- पाचन संबंधी समस्याएं
- प्रारंभिक अल्जाइमर रोग
जोखिम कारक:
- अधिक मातृ आयु (>35 वर्ष)
- जोखिम बढ़ता है: 30 वर्ष में 1:1000 से 40 वर्ष में 1:100
निदान:
- प्रसवपूर्व:
- उदकपुंज वेधन (15-18 सप्ताह)
- गर्भरस रोम प्रतिचयन (10-12 सप्ताह)
- पराध्वनि चित्रण
- प्रसवोत्तर:
- गुणसूत्र सेट विश्लेषण
- नैदानिक लक्षण अवलोकन
प्रबंधन:
- कोई विशिष्ट उपचार नहीं
- सहायक देखभाल और चिकित्सा
- प्रारंभिक हस्तक्षेप कार्यक्रम
- विशेष शिक्षा आवश्यकताएं
उपयोग आधारित प्रश्न (Application Based Questions)
प्रश्न 17: एक वाहक स्त्री (रक्तस्राव के लिए) की शादी सामान्य पुरुष से होती है। उनकी संतान में इस विकार के आने की संभावना का विश्लेषण करें। (3 अंक)
उत्तर:
संकरण: XHXh (वाहक स्त्री) × XHY (सामान्य पुरुष)
युग्मक:
- स्त्री: XH, Xh
- पुरुष: XH, Y
वर्गपट्ट:
XH Y
XH XHXH XHY
Xh XHXh XhY
परिणाम:
- बेटियां: 50% सामान्य (XHXH), 50% वाहक (XHXh)
- बेटे: 50% सामान्य (XHY), 50% प्रभावित (XhY)
निष्कर्ष:
- कोई भी बेटी प्रभावित नहीं होगी
- 50% बेटे प्रभावित होंगे
- 25% कुल संतति प्रभावित होगी
प्रश्न 18: बीटी कपास के विकास में वंशावली सिद्धांतों का क्या योगदान है? (3 अंक)
उत्तर:
आनुवंशिक अभियांत्रिकी प्रक्रिया:
- जीन पहचान: बैसिलस थुरिंजिएंसिस से बीटी जीन की पहचान
- जीन स्थानांतरण: टी प्लाज़्मिड के माध्यम से कपास के पौधों में स्थानांतरण
- वंशावली पैटर्न: मेंडलीय वंशावली के अनुसार अगली पीढ़ी में पारित होना
लाभ:
- कीट प्रतिरोध (बॉलवर्म के विरुद्ध)
- कम कीटनाशक उपयोग
- अधिक फसल उत्पादन
- पर्यावरणीय लाभ
वंशावली तंत्र:
- बीटी जीन प्रभावी अपयाप की तरह व्यवहार करता है
- समयुग्मजी और विषमयुग्मजी पौधे कीट प्रतिरोधी होते हैं
- बीजों से अगली पीढ़ी में स्थानांतरित होता है
वर्तमान अनुसंधान:
- जीन संचयन (कई बीटी जीन)
- प्रतिरोध प्रबंधन रणनीतियां
- जैव सुरक्षा मूल्यांकन
तार्किक प्रश्न (Reasoning Based Questions)
प्रश्न 19: “मेंडल को आनुवंशिकता का जनक क्यों कहा जाता है?” इस कथन की तार्किक व्याख्या करें। (3 अंक)
उत्तर:
कारण:
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण:
- पहली बार गणितीय विश्लेषण का उपयोग
- बड़ा नमूना आकार (28,000 पौधे)
- सांख्यिकीय प्रमाणीकरण
- व्यवस्थित पद्धति:
- नियंत्रित प्रयोग
- शुद्ध प्रजनन वंशावली का चयन
- कई पीढ़ियों का अध्ययन
- सार्वभौमिक नियम:
- जो सिद्धांत दिए वे सभी जीवों पर लागू होते हैं
- आधुनिक आनुवंशिकता की नींव
- व्यावहारिक उपयोग:
- उनके नियमों का उपयोग प्रजनन कार्यक्रमों में
- चिकित्सा आनुवंशिकता में उपयोग
- जैव प्रौद्योगिकी का आधार
ऐतिहासिक महत्व:
- डार्विन के समय में वंशावली का तंत्र अज्ञात था
- मेंडल ने कणिका वंशावली की संकल्पना दी
- आधुनिक आणविक आनुवंशिकता की नींव रखी
प्रश्न 20: “आनुवंशिक विविधता विकास के लिए क्यों आवश्यक है?” इस प्रश्न का वैज्ञानिक आधार पर उत्तर दें। (4 अंक)
उत्तर:
आनुवंशिक विविधता के स्रोत:
- उत्परिवर्तन: नए अपयापों का निर्माण
- यौन प्रजनन: आनुवंशिक पुनर्संयोजन
- पारगमन: नए जीन संयोजन
- स्वतंत्र अपव्यूहन: विभिन्न लक्षण संयोजन
विकास में भूमिका:
- प्राकृतिक चयन का पदार्थ:
- विविधता होगी तभी चयन हो सकता है
- अनुकूल विविधताओं को फायदा
- प्रतिकूल विविधताएं समाप्त हो जाती हैं
- पर्यावरणीय अनुकूलन:
- बदलते परिवेश के लिए विभिन्न लक्षणों की जरूरत
- आनुवंशिक भंडार में विकल्प उपलब्ध होने चाहिए
- जाति अस्तित्व:
- अंतःप्रजनन अवसाद से बचाव
- रोग प्रतिरोध बनाए रखना
- जनसंख्या के जीवित रहने की संभावनाएं बढ़ाना
वास्तविक जीवन के उदाहरण:
- कोविड-19 महामारी में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया की विविधताएं
- प्रतिजैविक प्रतिरोध में जीवाणु विविधताएं
- जलवायु परिवर्तन अनुकूलन में पादप किस्में
निष्कर्ष: आनुवंशिक विविधता के बिना, विकास असंभव होगा और जातियां विलुप्ति के लिए असुरक्षित होंगी।
संशोधन जांच सूची (Revision Checklist)
मुख्य सूत्र और अनुपात
स्मरणीय अनुपात:
- एकसंकर F2: 3:1 (लक्षणप्ररूप), 1:2:1 (जीनप्ररूप)
- द्विसंकर F2: 9:3:3:1
- परीक्षण संकरण: 1:1
- लिंग सहलग्न वंशावली: 1:1 (प्रभावित बनाम सामान्य पुरुष)
हार्डी-वाइनबर्ग सूत्र:
p² + 2pq + q² = 1 (जहां p + q = 1)
महत्वपूर्ण स्मृति सहायक
आनुवंशिक संकरण के लिए ABCD:
- Aविश्लेषण माता-पिता
- Bप्रजनन (संकरण)
- Cगणना संतति
- Dनिर्धारण अनुपात
डाउन सिंड्रोम के लक्षण (MENTAL):
- Mानसिक मंदता
- Eआंख ऊपर तिर्छी
- Nगर्दन छोटी और मोटी
- Tजीभ बाहर निकली
- Aल्जाइमर जोखिम
- Lछोटा कद
अंतिम तैयारी सुझाव (Final Preparation Tips)
यह संपूर्ण गाइड आपको CBSE कक्षा 12 जीव विज्ञान के आनुवंशिकता और विविधता के सिद्धांत अध्याय में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए तैयार करेगी। नियमित अभ्यास और उचित समझ के साथ, आप निश्चित रूप से अच्छे अंक प्राप्त कर सकेंगे।
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